Monday, May 4, 2009

सजा बिना अपराध की




अगर साँसे दिखाई देती तो एहसास भी दिखते,
वक्त को थाम पाते तो इतिहास भी दिखते।
- किरण सिन्धु

यह तो सभी जानते है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक की अवधि जीवन है, परन्तु मेरे दृष्टिकोण में मनुष्य जीवन को हर क्षण में जीता है और उसके बीत जाने के बाद उसे समझता है. अपने जीवन के प्रारंभ में ही या यों कहें कि अपनी बाल्यावस्था में ही मैंने अपनी माँ को खो दिया था. एक अबोध शिशु के लिए माँ क्या होती है उसे आज तक कोई लेखनी व्यक्त नहीं कर पाई. मुझे अभी भी याद है बाबूजी ने कहा ''माँ अस्पताल गयी है'', दादी ने कहा ''माँ भगवान् के पास गयी है '' और दीदी ने कहा कि माँ तारा बन गयी है. इन सभी बातों का मेरे लिए एक ही अर्थ था कि माँ नहीं है और नहीं है तो फिर कब आएगी? कुछ ही दिनों में आभास हो गया कि ये सारे प्रश्न निरुत्तर थे. उम्र की पगडंडी पर चलते-चलते एक समय ऐसा भी आया जब मैं स्वयं माँ बनी. इश्वर ने मुझे संतान के रूप में तीन अमूल्य रत्न दिए -एक प्यारी सी बेटी और दो बेटे. अपनी भरपूर ममता और सरंक्षण में मैं इन्हें पालने में लग गयी. मेरे बच्चों ने मुझे इस विश्व की सबसे अधिक सौभाग्यशालिनी माँ बना दिया, ऐसा मेरा सोचना था. मैं सदा उपरवाले से यही दुआ माँगती कि हर जन्म में मैं इन्ही बच्चों की माँ बनूँ. लेकिन हाय विधाता! एक दिन इस माँ को फिर से नियति की विडम्बना को झेलना था. मेरा बेटा किसलय सदा के लिए हम तीनो को छोड़ कर चला गया. ऐसा लगता है मेरे शारीर के साथ-साथ मेरी आत्मा का भी एक हिस्सा कट कर अलग हो गया है. मेरे जीवन में उसका नहीं होना एक क्रूर सजा की तरह है जो मेरी सहनशक्ति के बाहर है. एक शिशु तो अपनी माँ के बिना जी गया लेकिन एक माँ अपने शिशु के बिना कैसे जिए? हे इश्वर किसी माँ को ऐसी सजा मत देना! पर ऐसा लगता है जीवन और मृत्यु के इश्वर अलग अलग है, क्यूंकि इश्वर स्वयं जिनके सारथी थे उस अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु भी युवावस्था में ही हुई थी और श्री राम स्वयं इश्वर होते हुए भी अपने पिता की मृत्यु को रोक नहीं सके थे।

7 comments:

Kanupriya said...

And here goes your 2nd post live & running, now u need to learn to post on your own :-).
And as far as your post is concerned, ma I really don't understand what plans your ishwar has for us! Jitna socho utni hi bechaini aur takleef hoti hai. But me & Kuashik need you like always & you need to get back to life for the sake of all of us. I am really happy to see you get back to your long lost passion slowly, trust me even Amitesh Bhaiya & Kishu must be getting really happy to see you learn internet :-)

रश्मि प्रभा... said...

मृत्यु के आगे प्रभु की विवशता जीने का हौसला देती है,और नैनं छिदंति शस्त्राणि ......वह यहीं कहीं है,आपके हौसले में,आपकी यादों में,आपकी लेखनी में,आपकी पूरी दिनचर्या मैं.........

tellmeyourdreams said...

aunty i cudnt stop my eyes from gettin filled with tears.. i cud feel the pain as i am a mothr too..no pain can match urs and i really admire ur strength..keep writing.looking forward to ur next post.

Renu said...

Nobody knows why god does what he does, but he knows better than us.I can feel the pain u r going thru, but as u urself have written....krishna didnt stop Abhimanyu,and there are so many instances of that...life must go on,for the sake of ur children u will have to gather ur courage and live...and then live happily.

TreazureChest_Nids said...

Namaste Aunty.....Aap par kya beeti hogi uska ab thoda sa andesha hai mujhe....phir bhi...zindigai to jeeni hai...baaki sab ke liye...apne liye.

shabdon ka ek jaal sa bun jaata hai aapki likhai mein...jismein aadmi phansna chahta hai.... Apna honsla banaye rakhiye aur likhte rahiye.....

Anonymous said...

Aunty ye padhne ke baad koi words nahi hain mere paas bas aankhon se aansun girne se rok rahi hun kyunki office mein hun.
May God bless u aunty.Bas bahut ho gayi bhagwanji ki pariksha..

tikulicious said...

Aapki kavitayen padhi aur ehsas hua ki mere alava aur bhi log hain jo apne se judne ka prayas kar rahe hain ..bahut aanand aaya ..hamse apne bhav bantne ke liye shkriya